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मायावती 1995 में उत्तर प्रदेश की सबसे युवा मुख्यमंत्री थीं, क्या फिर सीएम की कुर्सी पर बैठेंगी?

बुहजन समाजवादी पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती (Mayawati) का 66वां जन्मदिन मना रही हैं. उनकी पार्टी अपनी नेता का जन्मदिन ‘जन्मदिन जन कल्याणकारी दिवस’ के रूप में मना रही है. 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में पैदा हुईं मायावती देश की पहली दलित नेता हैं, जिन्होंने अपने दम पर सरकार बनाई हो. वो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का 4 बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. उन्होंने शनिवार को अपने जन्मदिन पर बसपा के कार्यकर्ताओं से जन्मदिन पर बसपा की सरकार के रूप में सबसे किमती तोहफा देने की अपील की. 

कैसा रहा है मायावती का सफर

देश की सबसे बड़ी परीक्षा में शामिल होने की तैयारी कर रहीं मायावती को बसपा के संस्थापक कांशीराम राजनीति में लेकर आए थे. वो आईएएस तो नहीं बन पाईं. लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री अवश्य बनीं, वह भी एक नहीं चार बार. मायावती की पहचान कड़क प्रशासनिक तेवर वाली राजनेता के रूप में होती है. 

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15 जनवरी साल 1956 को दिल्ली में जन्मी मायावती का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के छोटे से गांब बादलपुर का रहना वाला है. मायवती के पिता प्रभुदास डाक विभाग में काम करते थे. मायावती ने साल 1975 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कालेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एलएलबी और गाजियाबाद के एक कॉलेज से बीएड की पढ़ाई की है. 

मायावती ने कब लड़ा था पहला चुनाव

मायावती ने अपना पहला चुनाव 1984 में कैराना लोकसभा सीट से लड़ा था. इसके बाद 1985 में उन्होंने बिजनौर और 1987 में हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्हें पहली जीत 1989 में मिलीं. उस साल वो बिजनौर से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं.  वो 1994 में राज्य सभा के लिए भी चुनी गईं. मायावती ने 3 जून 1995 को पहली बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनीं. वो प्रदेश की सबसे युवा मुख्यमंत्री थीं. उस समय वो देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री थी. उनके शपथ ग्रहण को देश में एक बहुत बड़े सामाजिक बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा गया था. उसके बाद से वो 1997, 2003 और 2007 में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठीं. 

बसपा ने सबसे शानदार प्रदर्शन कब किया था

मायावती के नेतृत्व में बसपा ने 2007 में सबसे शानदार प्रदर्शन किया था. उस चुनाव में बसपा ने विधानसभा की 403 में से 206 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन इसके बाद 2012 और 2017 के चुनाव में बसपा का प्रदर्शन कमजोर होता गया. साल 2017 के चुनाव में बसपा को 403 में से केवल 19 सीटें ही मिलीं. 

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मायावती के नेतृत्व में बसपा एक बार फिर चुनाव मैदान में है. बसपा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सत्ता में  वापसी के लिए जोर लगा रही है. लेकिन यह 10 मार्च को आने वाले चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि बसपा अपने मिशन में कितना कामयाब हो पाती है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 5वीं बार बैठने का मायावती का सपना पूरा होता है या नहीं, इसका भी पता 10 मार्च को ही चलेगा.

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